पटना। नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का आंदोलन पिछले एक महीने से जारी है। पंजाब और हरियाणा के साथ-साथ अन्य राज्यों के भी कृषक दिल्ली की सामाओं पर डटे हुए हैं वहीं कांग्रेस के युवा नेता और पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी राष्ट्रपति को नए कृषि कानूनों के खिलाफ दो करोड़ हस्ताक्षर सौंपे। लेकिन खास बात यह है कि उत्तर प्रदेश की तरह बिहार में भी कांग्रेस नेताओं को इन हस्ताक्षरों के बारे में जानकारी नहीं है। बिहार के कांग्रेस नेताओं का भी कहना है कि उन्हें इन हस्ताक्षरों के बारे में कोई इल्म नहीं है। सभी प्रमुख नेताओं के बयान हस्ताक्षर को लेकर अलग-अलग हैं। जानकारी के मुताबिक प्रदेश प्रवक्ता से लेकर प्रदेश अध्यक्ष और विधायक दल के नेता तक को ठीक से हस्ताक्षर के बारे में जानकारी नहीं है।
खास बात यह है कि कांग्रेस नेताओं को इसके बारे में भी जानकारी नहीं है कि प्रदेश में हस्ताक्षर अभियान कब चलाया गया और कितने हस्ताक्षर हुए? वहीं हस्ताक्षरों का बंडल लेकर दिल्ली कौन गया और किसे सौंपा? हालांकि शीर्ष के एक-दो नेताओं ने इतनास जरूर बताया कि अभियान जरूर चला होगा। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा से जब हस्ताक्षर के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि बिहार में कुछ समय पहले हस्ताक्षर अभियान प्रारंभ किया गया था। मगर बीच में विधानसभा चुनाव आ गया जिसकी वजह से अभियान की गति धीमी पड़ गई थी। साथ ही उन्होंने कहा कि इससे ज्यादा उन्हें कुछ भी जानकारी नहीं है। वहीं कांग्रेस विधायक दल के नेता अजीत शर्मा का कहना है कि उनकी जानकारी में ऐसा कोई अभियान नहीं चलाया गया। रविवार को पार्टी का स्थापना दिवस मनाया जाना है। इस दौरान किसानों के मसले पर भी चर्चा होगी जरूरत पड़ी तो हस्ताक्षर अभियान भी चलाया जाएगा। विधान पार्षद प्रेमचंद्र मिश्रा की माने तो हस्ताक्षर अभियान चलाया गया था। कुछ हस्ताक्षर भी जुटा लिए गए थे जिन्हेंं पार्टी आलाकमान को भेज दिया गया।