‘अयोध्या’ को दिल्ली भेजने पर अब बिहार सरकार लेगी फैसला

पटना। पटना के संजय गांधी जैविक उद्यान से अयोध्या नामक गैंडे को दिल्ली भेजने का मामला फिलहाल थम गया। अयोध्या को दिल्ली ले जाने के लिए  डेरा डालने वाली टीम को अभी लौटा दिया गया। अब इस मामले में विभाग नहीं राज्य सरकार फैसला लेगी। इस संबंध में वाइल्ड लाइफ एक्टिविस्ट अजय दुबे ने राज्य सरकार से शिकायत करते हुये कहा कि संजय गांधी जैविक उद्यान से अयोध्या नामक गैंडे को वाइल्ड लाइफ एक्ट के प्रावधानों के विरुद्ध यहां से दिल्ली ले जाने की कोशिश की जा रही है। 


 दरअसल पटना का संजय गांधी जैविक उद्यान गैंडों के रखरखाव और प्रजनन के मामले में देश में नंबर एक पर है। यहां फिलहाल एक दर्जन नर और मादा गैंडा हैं। उनकी वंशावली भी बनाई गई। इस चिड़ियाघर की खासियत यह है कि यहां कभी भी रक्त संबंधों में गैंडों की मैटिंग नहीं कराई गई। जानकारों का कहना है कि ऐसा करने से नस्ल खराब होने का खतरा रहता है। अजय दुबे ने अपनी शिकायत में कहा कि दिल्ली में जिन मादा गैंडों के बीच भेजा जा रहा है, उनसे अयोध्या के रक्त संबंध हैं। यही कारण है कि उसे दिल्ली के राष्ट्रीय जैविक उद्यान भेजने को लेकर तमाम सवाल खड़े हो रहे हैं। खास बात यह है कि अयोध्या नामक एक सींग वाले गैंडे के बदले में दिल्ली के राष्ट्रीय जैविक उद्यान से हिरन दिए जा रहे हैं, जो कि कतई तर्कसंगत नहीं है। जबकि तीन वर्ष पूर्व नर गैंडे के बदले मादा देने की बात हुई थी। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी वर्ष 2019 में गोरखपुर के चिड़ियाघर के लिए एक गैंडे की मांग की थी। तब यूपी के प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया था। राज्य सरकार ने यहां साढ़े पांच करोड़ से गैंडों का ब्रीडिंग सेंटर बनवाया है। उस पर भी संकट के बादल मंडराने लगेंगे। तत्कालीन चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन ने सरकार को लिखा था कि अगले तीन-चार साल तक पटना के संजय गांधी जैविक उद्यान से किसी भी गैंडे का एक्सचेंज किसी के साथ ना किया जाए।